Adhyay 6 • Shlok 234

चा0—सयनय सयरपिि कपि भालय गUमारेU । परेU भŒमि निसिचर‹िगU `े मारेU॥ मम गिUि ला»ि ि`े §‹गU पýाना । सकल `िुा'U सयरेUस सय`ाना॥ 1॥ सयनय „»ेस पýभय कार यगU बानी । ुिि ु»ाˇ `ानगिंU मयनि ‚यानी॥ पýभय सक ˜िाभयुन मारि `िुार्§ । केरवल सकýरगिU दी‹िगU ब˙‚Uार्§॥ 2॥ सयˇा बराि कपि भालय `िुा० । गUराि 'U˘ेU सब पýभय पगिंU ुा०॥ सयˇाबहCि ्U भा दयगयU दल“रपर । `ि० भालय कपि नगिंU र`नीचर॥ 3॥ रामाकार भ० िि‹गU केर मन । मयQर भ० छŒUंेU भव बंˇन॥ सयर ुंसिक सब कपि ुLर रीछा । `ि० सकल रघायपिि कीउ र्§छा॥ 4॥ राम सरिस को दीन गिUिकारी । की‹गेU मयकयरि निसाचर Ûारी॥ „ल मल ˇाम काम रि रावन । »िि पार्§ `ो मयनिबर पाव न॥ 5॥

Roman Transliteration (IAST)

938 * ŚR’ RMACARITAMNASA*

Translations

English Translations 1
Gita Press English

▼ Understand This Shlok Better

Personalized AI explanation tailored to your profile & reading level

Commentaries & Exposition

No commentaries available for this Shlok.

« Previous Shlok Adhyay 6 Overview