चा0सयनय सयरपिि कपि भालय गUमारेU । परेU भŒमि निसिचरिगU `े मारेU॥ मम गिUि ला»ि ि`े §गU पýाना । सकल `िुा'U सयरेUस सय`ाना॥ 1॥ सयनय „»ेस पýभय कार यगU बानी । ुिि ु»ाˇ `ानगिंU मयनि यानी॥ पýभय सक िाभयुन मारि `िुार्§ । केरवल सकýरगिU दीिगU ब˙‚Uार्§॥ 2॥ सयˇा बराि कपि भालय `िुा० । गUराि 'U˘ेU सब पýभय पगिंU ुा०॥ सयˇाबहCि ्U भा दयगयU दल“रपर । `ि० भालय कपि नगिंU र`नीचर॥ 3॥ रामाकार भ० ििगU केर मन । मयQर भ० छŒUंेU भव बंˇन॥ सयर ुंसिक सब कपि ुLर रीछा । `ि० सकल रघायपिि कीउ र्§छा॥ 4॥ राम सरिस को दीन गिUिकारी । कीगेU मयकयरि निसाचर Ûारी॥ „ल मल ˇाम काम रि रावन । »िि पार्§ `ो मयनिबर पाव न॥ 5॥
938 * ŚR’ RMACARITAMNASA*
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