चा0दे„ि गUनŒमान ुिि गUरो' । पयलक »ाि लोचन `ल बरो'U॥ मन मग¡U बगयUि भा¡िि सय„ मानी ।बोले'U ावन सयˇा सम बानी॥ 1॥ `ासय बिरग¡U सोचगयU दिन रािी । रंUगयU निरंUिर »यन »न पा¡िी॥ रघायकयरल ििलक सय`न सय„दािा । ुाय'U कयरसल देव मयनि ािा॥ 2॥ रिपय रन `ीिि सय`स सयर »ावि । सीिा सगिUि ुनय` पýभय ुावि॥ सयनि बचन बिसरेU सब दŒ„ा । िहावंि `िमि पा§ पियŒा॥ 3॥ को ियगU िाि कगUा¡ िे ुा० । मोगिU परम पिýय बचन सयना०॥ माLरि सयि माउ कपि गUनयमाना । नामय मोर सयनय कहरपानिˇाना॥ 4॥ दीनबंˇय रघायपिि कर किंरकर । सयनि भरि भेउंेU'U 'U˘िU सादर॥ मिलि पýेम नगिंU NUदय¡ समािा । नयन dवि `ल पयलकिि »ािा॥ 5॥ कपि िव दरस सकल दय„ बीिे । मिले ुा`य मोगिU राम पिरीिे॥ बार बार बŒÛाी कयरसलािा । िो कगUय¡ दे'¡U कागU सयनय भýािा॥ 6॥ ०गिU संदेस सरिस `» मागUीउ । करि बिचार दे„े'¡U कछयU नागUीउ॥ नागिUन िाि 'Uरिन माउ िोगUी । ुब पýभय चरिि सयनावगयU मोगUी॥ 7॥ िब गUनयमंि ना§ पद माथा। कगेU सकल रघायपिि »यन »ाथा॥ कगयU कपि कबगय¡U कहरपाल »ोसा§Z । सयमिरगिंU मोगिU दास की ना§Z॥ 8॥
952 * ŚR’ RMACARITAMNASA*
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